Thursday, December 24, 2009

हम-ज़लीस..



...

"पहली सोच..
आखिरी पड़ाव..

अनमोल..
तहखाना..

ख़जाना..
सौगात..

तस्वीर..
रूह..

इबादत..
ईमान..

अक्स-ए-ज़िन्दगी..
खुशबू का बिछौना..

हम-ज़लीस..
तेरा शुक्रिया..!"

...

4 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Gaagar men saagar.


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अंग्रेज़ी का तिलिस्म तोड़ने की माया।
पुरुषों के श्रेष्ठता के 'जींस' से कैसे निपटे नारी?

वाणी गीत said...

शुक्रिया ...:).....!!

आकांक्षा गर्ग said...

ये हम-ज़लीस कहीं हम तो नहीं :)
बढ़िया प्रस्तुति.. बधाई !
प्रकाम्या

Priyankaabhilaashi said...

आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद..