Wednesday, January 20, 2010

'बचपन की मासूमियत..'


...


"वो सूना आंगन..
वो ठूंठ आम..
वो पगडंडी ..
वो बे-जार तन्हाई..

अब तक पड़ी है..

सांसों से चिपकी..
आंखों से लिपटी..
यादों में सिमटी..

बचपन की मासूमियत..!"

...

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

अजय कुमार said...

अच्छे भाव वाली रचना

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद अजय कुमार जी..!!