Thursday, March 18, 2010

'कलाई..'



...


"रवानी का जोश..
भिगो गया..
रूह को..

भीड़ में..
तन्हा छोड़ गया..

जुर्म था..
फ़क़त इतना..
बे-इन्तिहाँ..
बेख़ौफ़..
आफताब कसमसाया था..
गेसुओं की नरम कलाई से..!"


...

4 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Udan Tashtari said...

बढ़िया!

M VERMA said...

गेसुओं की नर्म कलाई'
वाह क्या उपमा है
बहुत सुन्दर

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद वर्मा जी..!!