Monday, April 19, 2010

'सल्तनत-ए-फिरदौस..'


...

"गेसुओं में उलझी..
इक हंसी प्यारी..
बरकत से महके..
झोली तुम्हारी..
हर मोड़े मिले..
रिश्तों की क्यारी..
सल्तनत-ए-फिरदौस..

...

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!