Saturday, April 24, 2010

'दुआ..'



...

"महबूब की बाहें..
वो नशीली निगाहें..
मीलों आकाश..
मुस्कुराता पलाश..
वादियों का साज़..
पक्षियों की आवाज़..

ए खुदा..
मेरी दुआ..
मुकम्मल कर दे..!!

...

4 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

दिलीप said...

bahut khhob...apki dua mukammal ho yahi meri dua hai...

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद दिलीप जी..!!