Monday, April 26, 2010

'आँसू..'


...

"सपना संजो रखा है..
फ़क़त..कैसे तोड़ें..
पाया है तुम्हें..
अब..कैसे छोड़ें..
हाल-ए-दिल ब्याँ..
कैसे धडकनें मोड़ें..

मेरी मय्यत पर..
खैर..
आँसू पुराने..
कोई कैसे जोड़ें..!"

...

8 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

वन्दना said...

बहुत खूब्।

संजय भास्कर said...

संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद वंदना जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

M VERMA said...

बहुत भावुक कर देती हैं आप

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद वर्मा जी..!!

दिलीप said...

bahut khoob...

रोहित said...

'mushkil to hota hai,
jab prem me me virah ka anamel mel hota hai..
pr virah ke aashu poch aage bhi to badhna hota hai,
kyonki prem ki sarthakta jevan path par agrsar rhne me hi hota hai'

sundar rachna!
aabhar-
#ROHIT