Thursday, May 13, 2010

'नन्ही-सी प्यारी कोयल..'


...

"गुनगुनाती..
मूरत चमकाती..
मुस्कुराती..
रंग सजाती..
इठलाती..
सपने दिखलाती..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..


व्याकुल है..
आपाधापी से..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..


गुम हुआ..
शेह्तूत से..
घरौंदा उसका..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..


निर्लज्ज खड़ी..
अट्टालिका..
चिढ़ा रही..
अन्धाधुन प्रहार..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..


कितने मित्र..
कालग्रसित हुए..
अहंकारी मानसिकता के..
कब होगा इन्साफ..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..


गूँज सहेज..
चुलबुलाहट समेट..
चल रहा..
मतलबी मंथन..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..


दे सकता..
उसका कोना..
उसका घरौंदा..
सूत समेत..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..


सुसज्जित सुशोभित..
इक प्रयास..
सजाया है..
उसका संसार..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..


क्षमा करना..
करो विश्राम..
तुम्हारा रहेगा..
सदैव तुम्हारा..

आई है..
मेरे आँगन..
बरसों बाद..
वो नन्ही-सी..
प्यारी कोयल..!!"

...

7 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

fie se mithi awaaz ki yaad dila di aapne........

संजय भास्कर said...

सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

दिलीप said...

waah bahut sundar...ishwar kare ab ye koyal hamesha yunhi gaati rahe...

HITESH said...

Aap Ki Kavita, Koyal Ki Tarah Hi Madhur Hai ...!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद दिलीप जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद हितेष जी..!!