Wednesday, May 26, 2010

'खज़ाना-ए-दिल..'




...

"दफ़ना आया हूँ..
वजूद..
रोज़-रोज़ की दलीलों ने..
ऐवें ही..
खज़ाना-ए-दिल..
बेज़ार किया..!!"

...

15 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

उम्मेद गोठवाल said...

गागर में सागर भर दिया........सराहनीय आकर्षक प्रस्तुति।

माधव said...

really soothing

kunwarji's said...

WAAH!
GOTHIYAAL JI NE SAHI KAHA..

KUNWAR JI,

संजय भास्कर said...

ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

sangeeta swarup said...

खूबसूरत.....

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद उम्मेद जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद माधव जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद कुंवर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संगीता आंटी..!!

महफूज़ अली said...

बहुत सुंदर......

राजेन्द्र मीणा said...

कम शब्दों में गहरी बात कहना ,,,,,,गज़ब का अंदाज़ होता है ,,,यहाँ वही दिखा ....बधाई स्वीकारे ////!!! http://athaah.blogspot.com/

राजेन्द्र मीणा said...

शब्दों के इस सफ़र में आज से हम भी आपके साथ है

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद राजेंद्र मीणा जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद महफूज़ अली जी..!!