Tuesday, May 11, 2010

'बाज़ार-ए-ईमान..'


...

"जुस्तजू में भिगो दामन..
लाया हूँ शबनम..
थोड़ी नज़रों पर रख लेना..
थोड़ी फलक पर झटक देना..

सुना है..
अश्कों की कीमत..
लगती है..
बाज़ार-ए-ईमान में..!!"

...

8 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

फ़िरदौस ख़ान said...

अति सुन्दर...

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

दिलीप said...

waah...

देवेश प्रताप said...

क्या बात है !!....बहुत खूब

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद फ़िरदौस खान जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद दिलीप जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद देवेश प्रताप जी..!!