Saturday, May 22, 2010

'वादियाँ..'


...

"ढूँढता हूँ..
जब कभी..
अपने निशां..
पाता हूँ..
तेरा अक्स..
वादियों में घुला..!!"

...

4 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Udan Tashtari said...

बढ़िया.

उम्मेद गोठवाल said...

संक्षिप्तता ही कला है........बेहतरीन प्रस्तुति।

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद उम्मेद जी..!!