Thursday, June 3, 2010

'सिलवट..'


...

"यादों के दिये..
जले-बुझे..
रात भर..
हर करवट..
हर सिलवट..
क़ैद रही..
रूह में..
हर नफ्ज़..!"

...

6 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

आचार्य जी said...

आईये जाने ..... मन ही मंदिर है !

आचार्य जी

संजय भास्कर said...

वाह ! कितनी सुन्दर पंक्तियाँ हैं ... मन मोह लिया इस चित्र ने तो !

Shekhar Kumawat said...

nice

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद आचार्य जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद शेखर कुमावत जी..!!