Thursday, June 17, 2010

'उठो..उठो..ए-भारतवासी..!!!'




...

"आँगन में अलसायी..
खनखनाती कनक..

भेदती समय-चक्र..
हौसले की खनक..

ह्रदय-ताल में गहराई..
इंसानियत की जनक..

कब तक जलाएगी..
यह राजनीति की भनक..

संगठित संपदा करती कमाल..
यहाँ-वहाँ फैली चनक..

उठो..
उठो..
ए-भारतवासी..

सुनो..
भारत माँ की पुकार..

मिटा मन के विषण..
खोलो राह एक नयी..
दीप जलाओ खुशियों के..
बहाओ धारा एक नयी..

उठो..
उठो..!!"

...

6 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई...शब्द शब्द दिल में उतर गयी.

माधव said...

बहुत अच्छा

दिलीप said...

sundar aahvahan

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद माधव जी..!!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद दिलीप जी..!!