Monday, June 28, 2010

'काज़ल का दरिया..'


...

"जुबां मिलती हैं..
जब कभी..
इक तेरा ही..
फ़साना गूंजता है..

सहारा मिलता है..
जब कभी..
इक तेरा ही..
तराना ढूँढता है..

बाँध दो..
समा..नज़रों से..
ना पिघले..
काज़ल का दरिया..
फिर कभी..!"

...

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

देवेश प्रताप said...

वाह !!! क्या बात है ....

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद देवेश प्रताप जी..!!