Saturday, July 17, 2010

'मुंतज़िर..'


...

"जीने की ख्वाइश दबी रही..
ता-उम्र..
फासला रूह का..
तय कर ना सका..
मेरा मुंतज़िर..!!!"

...

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

ana said...

do shabdo me sra kuchh kaha daalaa.........