Saturday, October 2, 2010

'अरमां ..'



...

"ए-ज़िन्दगी..
क़र्ज़ उतारने की चाहत..
हर्फ़ समेटने की राहत..

काश..
मुनासिब हो..
*कामिल हो..

ये अरमां कभी..!!"

...

*कामिल = पूरा होना..!!

8 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

कमाल की लेखनी है आपकी लेखनी को नमन बधाई

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Shekhar Suman said...

bahut khub.....
kuch to baat hai..

mridula pradhan said...

bahot achchi lagi.

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद शेखर सुमन जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मृदुला प्रधान जी..!!

Akshita (Pakhi) said...

कित्ता अच्छा लिखती हैं आप ...बधाई.
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'पाखी की दुनिया' में अंडमान के टेस्टी-टेस्टी केले .

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद पाखी जी..!!