Monday, November 8, 2010

'रिश्तों की चादर..'


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"इकरार करते जाना..ज़रा..
इज़हार करते जाना..ज़रा..

बर्फीली हैं..रिश्तों की चादर इन दिनों..!"


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2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

deepakchaubey said...

मेरे एक मित्र जो गैर सरकारी संगठनो में कार्यरत हैं के कहने पर एक नया ब्लॉग सुरु किया है जिसमें सामाजिक समस्याओं जैसे वेश्यावृत्ति , मानव तस्करी, बाल मजदूरी जैसे मुद्दों को उठाया जायेगा | आप लोगों का सहयोग और सुझाव अपेक्षित है |
http://samajik2010.blogspot.com/2010/11/blog-post.html

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद दीपक चौबे जी..!!