Wednesday, November 17, 2010

'मूक पशुओं की सुनो पुकार..'

आज ईद पर अनगिनत मूक पशु-पक्षियों का क्रंदन हर ओर गूँज रहा है..दया और करुणा करें..अहिंसा का मार्ग अपनाएँ.. 'जियो और जीने दो'..!!


...


"मूक पशुओं की सुनो पुकार..
करते क्रंदन..
भय व्याकुलता अशांति..
आज चहुँ ओर..
हुई व्याप्त है..

हिंसा के परमाणु बसे..
क्यूँ ह्रदय में..

प्रिय है जीवन उनको भी..
करो दान..
दो उनको 'अभयदान'..

विवेक का परिचय..
उदारता का हाव..
कृतज्ञ रहेंगे सदा..
फैलाओ करुणा भाव.!"


...

6 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Amit said...

aacha likha hai. ye pashu ki hathya rukni chaheye.
priuanka kaffi aacha hai.

MOHAMMED said...

aapne sab ke mann ki baat likh di he jo log keh nhi sakte he express nhi karte woh keh diya aap ne...

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद अमित जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मोहम्मद जी..!!

संजय भास्कर said...

लाजवाब...प्रशंशा के लिए उपयुक्त कद्दावर शब्द कहीं से मिल गए तो दुबारा आता हूँ...अभी
मेरी डिक्शनरी के सारे शब्द तो बौने लग रहे हैं...

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!!