Friday, February 4, 2011

'माँ..'




...

"देखता हूँ जब कभी..
आँखों के डेरे से..

समंदर लहराता है..
साँसों के फेरे से..

कैसे पहचान लेती हो..
बादल घनेरे से..

आँसू पोंछ देती हो..
आँचल के घेरे से..

वात्सल्य लूटाती हो..
सुबह-सवेरे से..

करुणामयी..
प्रेममयी..
स्नेही..

मेरी माँ..!!"

...

7 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" said...

माँ के प्रति कृतज्ञतापूर्ण नमन!

shekhar suman said...

:)
chhoo gayi....

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मयंक साहब..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद शेखर सुमन जी..!!

संजय भास्कर said...

बहुत ही भावपूर्ण और शशक्त अभिव्यक्ति

संजय भास्कर said...

बहुत खूबसूरत और भावुकता पूर्ण कोमल अहसास

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!