Thursday, March 10, 2011

'जीने की तलब..'



...

"ज़ज्बातों की आँधी से उलझता हूँ..
काफिला साथ..हर शब मचलता हूँ...

जीने की तलब..बेरंग हो चली है..!!"

...

5 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

यशवन्त माथुर said...

बहुत बढ़िया!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!

Udan Tashtari said...

वाह! बेहतरीन..

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!!

Patali-The-Village said...

बहुत बेहतरीन|धन्यवाद|