Wednesday, April 20, 2011

'अदा..'



...


"ज़ख्मों को लुभाती..
ज़िन्दगी तेरी हर अदा..
बेवफा हो तुम..
या..
मैं ग़मज़दा..!!"

...

6 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

यशवन्त माथुर said...

क्या बात है...
आपका लिखने का अंदाज़ बहुत जुदा है.

वाणी गीत said...

जुदा सी है ये अदा भी :)

संजय भास्कर said...

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद वाणी गीत जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!