Wednesday, April 27, 2011

'तन्हाई..'

...


"लफ़्ज़ों से बारिश थमती है..
जिस रोज़..
तन्हाई की चादर..
बिखर जाती है..
हर ओर..!!"


...

5 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

Er. सत्यम शिवम said...

बहुत गुढ़ बात छुपी है यहाँ।बहुत सुंदर।

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

निशांत said...

accha likha hai aapne..

kuch mere bhi

"mashaal bujhi hamari
aur
saaye ne saath chor diya "

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद निशांत जी..!!