Wednesday, July 18, 2012

'विधि-विधान..'




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"आना-जाना खेल जीवन का..
विधि-विधान बदल सके न कोई..
सुख-दुःख:..लेखा-जोखा..
भोग करे फसल जितनी बोई..!!!"

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2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

जीवन इक खेल तमाशा है...

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मयंक साहब..!!