Saturday, October 13, 2012

'प्रेम..'



...


"नज़र भर का फेर..
तुम्हारा निश्छल प्रेम..

जीवन भर का स्तम्भ..
तुम्हारा पवित्र प्रेम..

नदिया भर का खनिज..
तुम्हारा कलकल प्रेम..!!"


...

4 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

हरकीरत ' हीर' said...

नदिया भर का खनिज
तुम्हारा निश्छल प्रेम

बहुत सुंदर .....आपके नाम की तरह ....प्रियांकाभिलाषी जी ....:))

मन्टू कुमार said...

Kuchh panktiyan,prem ke gahre arth lie hue...waah..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद हरकीरत 'हीर' जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मन्टू कुमार जी..!!