Sunday, May 19, 2013

'इक गमला..'




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"तेरी याद का इक गमला रखा था जो मेज़ पर साथ बीते पलों के बीज वाला..फलने-फूलने लगा है..जब भी वहशत का तूफां आता है, नर्म साँसों की टहनी रूह की वादियों में कर देती है बौछार..!!! सिलवटों का असर उतर आया है गुलों की रंगत में..उँगलियों के पोर से सहलाती हूँ जब पत्तियाँ, कसती गिरफ़्त बढ़ा जाती है धड़कन..!!!

पर तुम नहीं होते हो..और यूँ ही मचलता है आफ़ताब की चांदनी से इसका जिस्म.. तरसती रूह हर शै वास्ते, मेरे जोगिया..!!!"


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---सन्डे नाईट थॉट्स..

14 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

GGShaikh said...

maulik aur beshkimati hai aapka lekhan ise sambhaal kar rakhna...
abhivyakti aur manobhaav sufiyane aur roohaniyat liye...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज सोमंवार (20-05-2013) के सरिता की गुज़ारिश : चर्चामंच 1250 में मयंक का कोना पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Nayank Patel said...

बीते पलों का बीज .....वहशत का तूफां .........नर्म साँसों की टहनी........रूह की वादियाँ .....सिलवटों का असर .........गुलों की रंगत........कसती गिरफ़्त बढ़ा जाती है धड़कन.........आफ़ताब की चांदनी ...............तरसती रूह हर शै वास्ते........तेरी याद का इक गमला.......मेरे जोगिया ................किसके बारे में क्या लिखूं ? ..........ये शब्द एक एक कहानी का टाइटल लग रहा है....एक एक उपन्यास बन सकता है .......ये सिर्फ sanday नाईट थॉट्स नहीं है ........हर अल्फ़ाज़ एक एक कहानी छुपाये बैठा है ...Your thoughts , in fact , nothing but chisel and hammer that carve our thoughts ....

Nayank Patel said...

बीते पलों का बीज .....वहशत का तूफां .........नर्म साँसों की टहनी........रूह की वादियाँ .....सिलवटों का असर .........गुलों की रंगत........कसती गिरफ़्त बढ़ा जाती है धड़कन.........आफ़ताब की चांदनी ...............तरसती रूह हर शै वास्ते........तेरी याद का इक गमला.......मेरे जोगिया ................किसके बारे में क्या लिखूं ? ..........ये शब्द एक एक कहानी का टाइटल लग रहा है....एक एक उपन्यास बन सकता है .......ये सिर्फ sanday नाईट थॉट्स नहीं है ........हर अल्फ़ाज़ एक एक कहानी छुपाये बैठा है ...Your thoughts , in fact , nothing but chisel and hammer that carve our thoughts ....

Laxman Bishnoi said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति !
बहुत कुछ का अनुसरण कर बहुत कुछ देखें और पढें

ब्लॉग प्रसारण said...

आपकी यह रचना कल मंगलवार (21 -05-2013) को ब्लॉग प्रसारण अंक - २ पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद जी जी शेख साब..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मयंक साब..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मयंक साब..!!

आभारी हूँ..

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद लक्ष्मण बिश्नोई जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद ब्लॉग प्रसारण जी..!!

आभारी हूँ..

Priyankaabhilaashi said...

नयंक साब..

हार्दिक धन्यवाद..!!! ये तो बस यूँ ही बह चलते हैं, नॉवल्स का तो पता नहीं कुछ भी..

Darshan Jangara said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति !

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद दर्शन जी..!!