Friday, November 22, 2013

'लकीरों की चाहत..'










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"तुम मेरी ज़िन्दगी का नहीं..मेरा एक अटूट हिस्सा बन चुके हो.. हर नफ्ज़ मुझमें शामिल रहते हो..कहीं भी जाऊँ, साँसें महकाते हो..कितने ही गहरे हों स्याह रात के साये, अपनी बाँहों में छुपा दर्द पिघला देते हो..!!!

आओ, उड़ जाते हैं भुला दुनिया..रवायत.. महसूस करते हैं लकीरों की चाहत..!!"

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5 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Yashwant Yash said...

कल 24/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

sushma 'आहुति' said...

बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद यशवंत जी..

सादर आभार..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!

Onkar said...

सुन्दर अभिव्यक्ति