Sunday, December 15, 2013

'ज्वनशील तत्व..'










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"हम कभी-कभी कितने बेबस हो जाते हैं न.. आज चाहते हुए भी किसी की फोटो लाईक नहीं कर सकती, वैसे अच्छा ही है.. दो शब्द अगर तारीफ़ के लिख दूँगी तो अपनापन बढ़ जाएगा और फिर जाने कितने भाव उमड़ आयेंगे..

और फिर..कितने ज्वनशील तत्व उत्पात मचायेंगे..!!!

जीवन-धारा को बहने देती हूँ..
अपनी डगर पर चलती रहती हूँ..
मेरी पसंद-नापसंद से क्या होना है..
मैं अक्सर..यूँ ही कहती रहती हूँ..!!"

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--कुछ सन्देश जो दिल से दिमाग तक पहुँचने में बहुत समय लगाते हैं..

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

parul chandra said...

बहुत अच्छा लिखा...

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद पारुल चंद्रा जी..!!