Saturday, February 13, 2010

'मौसम-ए-इज़हार..'



For so-called a Special Week of expressing one's feelings..


...


"मौसम है..
इज़हार का..

चलो..
राज़-ए-दिल..
खोल देते हैं..

कुछ जज़्बात लपेट 'Flowers' में..
भेजना तुम..

कुछ अरमां समेट 'Chocolates' में..
हम भेज देते हैं..

जो रह जायेंगे..
बिखरे यहाँ-वहाँ..
'Text/SMS' कर देंगे..

कितना आसां है ना..
'मौसम-ए-इज़हार' में..
'इश्क-ए-इज़हार'..

वो मान जाएँ..
तो आबाद..
ना मानें..
तो नाबाद..!"


...

4 comments:

  1. वाह !!! बहुत खूब

    ReplyDelete
  2. धन्यवाद विचारों का दर्पण जी..!!

    ReplyDelete
  3. धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!

    ReplyDelete

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!