
For so-called a Special Week of expressing one's feelings..
...
"मौसम है..
इज़हार का..
चलो..
राज़-ए-दिल..
खोल देते हैं..
कुछ जज़्बात लपेट 'Flowers' में..
भेजना तुम..
कुछ अरमां समेट 'Chocolates' में..
हम भेज देते हैं..
जो रह जायेंगे..
बिखरे यहाँ-वहाँ..
'Text/SMS' कर देंगे..
कितना आसां है ना..
'मौसम-ए-इज़हार' में..
'इश्क-ए-इज़हार'..
वो मान जाएँ..
तो आबाद..
ना मानें..
तो नाबाद..!"
...
वाह !!! बहुत खूब
ReplyDeleteक्या बात है.. :)
ReplyDeleteधन्यवाद विचारों का दर्पण जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!
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