
...
"महफूज़ रहा उम्र भर..तेरे साये से..
शफ्कत बरसता रहा..तेरे पाये से..
रोशन हुआ..फलक मेरा..
दुआ तेरी..उरूज मेरा..
मसरूर हुआ..वजूद मेरा..
महफिल तेरी..चरचा मेरा..
माँ...
तुझको अर्पण..
कुछ कलियाँ ताजी-सी..
कुछ यादें रूमानी-सी..
कुछ पलकें भीगी-सी..!"
...
बहुत अच्छी रचना लिखी गयी है .......माँ पर कुछ भी लिखे कम ही लगता है .....बहुत बढ़िया प्रस्तुति ./...........'माँ ' शब्द पर हमने भी कुछ लिखने की कोशिश की है ...आपके सुझाव सादर आमंत्रित है
ReplyDeletehttp://athaah.blogspot.com/
BAHUT SUNDAR BHAAV..........MATRI PREM KO SAMARPIT.
ReplyDeletemaa tujhe salaam...
ReplyDeleteBEAUTIFUL........
ReplyDeletesundar
ReplyDeleteधन्यवाद राजेंद्र मीणा जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद वंदना जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद दिलीप जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद संजय भास्कर जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद अपूर्ण जी..!!
ReplyDelete