Tuesday, May 11, 2010

'बाज़ार-ए-ईमान..'


...

"जुस्तजू में भिगो दामन..
लाया हूँ शबनम..
थोड़ी नज़रों पर रख लेना..
थोड़ी फलक पर झटक देना..

सुना है..
अश्कों की कीमत..
लगती है..
बाज़ार-ए-ईमान में..!!"

...

7 comments:

  1. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  2. क्या बात है !!....बहुत खूब

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  3. धन्यवाद फ़िरदौस खान जी..!!

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  4. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

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  5. धन्यवाद देवेश प्रताप जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!