Friday, March 25, 2011

'योगदान की पाठशाला..'




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"सजते-संवरते चंद्रमा की रंगमाला..
कोमल पुष्प की सुगन्धित वर्णमाला..
अद्भुत है संयोग..विशाल है मनोयोग..
होती है सरल..योगदान की पाठशाला..!!!"

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2 comments:

  1. "होती है सरल योगदान की पाठशाला "

    बहुत ही अच्छा लिखा है आपने.

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  2. धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!