Wednesday, May 4, 2011

' ख्वाइश..'




...


"परिंदे करते गुज़ारिश हैं..
छुपा लो..
रूह की ख्वाइश है..!!!"


...

2 comments:

  1. बहुत बढ़िया.

    सादर

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  2. धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!