Tuesday, July 5, 2011

'लकीर..'





...


"बारहां..
साज़िश-ए-साक़ी होती..
हर रोज़..
मिटा सको जो..
ऐसी लकीर..
मैं वो नहीं..!!"


...

4 comments:

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!