रूह से रूह के नाते कब नस्ल बदलते हैं...बहुत बहुत सुन्दर ...प्रियंका.सच भी तो यही है ना...जब रिश्ता आत्मा से आत्मा का हो...तो उसमें परिवर्तन की गुंजाइश कहाँ है
जी हाँ दी..!!!! आत्मा-से-आत्मा का मेल-मिलाप हो जहाँ..किसी और स्वप्न की आवश्यकता कहाँ..!!!
स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
रूह से रूह के नाते कब नस्ल बदलते हैं...बहुत बहुत सुन्दर ...प्रियंका.सच भी तो यही है ना...जब रिश्ता आत्मा से आत्मा का हो...तो उसमें परिवर्तन की गुंजाइश कहाँ है
ReplyDeleteजी हाँ दी..!!!!
ReplyDeleteआत्मा-से-आत्मा का मेल-मिलाप हो जहाँ..
किसी और स्वप्न की आवश्यकता कहाँ..!!!