आप भी शब्दों की खूब जादूगिरी करतीं हैं.'शहनाई-ए-मोहब्बत' से ऐसा लग रहा है जैसे मोहब्बत की शहनाई ही बज उठी हो.वाह!एक एक शब्द बोल रहा है.सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.मेरे ब्लॉग पर आपकी सुन्दर टिपण्णी के साथ दर्शन हुए,इसके लिए भी आभारी हूँ.यूँ ही संवाद बनाये रखियेगा.
bhaut hi khubsurat abhivakti...
धन्यवाद राकेश कुमार जी..!!
धन्यवाद सागर जी..!!
उत्तम भावों को अभिव्यक्त करती सुंदर कविता।
धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!
स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
आप भी शब्दों की खूब जादूगिरी करतीं हैं.
ReplyDelete'शहनाई-ए-मोहब्बत' से ऐसा लग रहा है
जैसे मोहब्बत की शहनाई ही बज उठी हो.
वाह!एक एक शब्द बोल रहा है.
सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.
मेरे ब्लॉग पर आपकी सुन्दर टिपण्णी के साथ दर्शन हुए,इसके लिए भी आभारी हूँ.
यूँ ही संवाद बनाये रखियेगा.
bhaut hi khubsurat abhivakti...
ReplyDeleteधन्यवाद राकेश कुमार जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद सागर जी..!!
ReplyDeleteउत्तम भावों को अभिव्यक्त करती सुंदर कविता।
ReplyDeleteधन्यवाद संजय भास्कर जी..!!
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