Wednesday, July 20, 2011

'ज़र्द..'




...


"ख्वाइश-ए-मुलाकात..
ज़र्द हुई..
इस बारिश..
ना समझे..
हाल-ए-दिल..
कभी..!!!"


...

12 comments:

  1. शानदार प्रस्तुति .आभार

    ReplyDelete
  2. आप भी चंद शब्दों में क्या क्या कह देतीं हैं,यह आप ही बेहतर बता पाएंगीं.
    हम तो इसे बेहतरीन ही कहेंगें.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,नई पोस्ट जारी की है.

    ReplyDelete
  3. बरसात का बादल तो आवारा है क्या जाने .......

    ReplyDelete
  4. धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!

    ReplyDelete
  5. धन्यवाद शिखा कौशिक जी..!!!

    ReplyDelete
  6. धन्यवाद राकेश कुमार जी..!!!

    ReplyDelete
  7. धन्यवाद सुनील कुमार जी..!!!

    ReplyDelete
  8. chand sabdo me hi sari kahani bayan ker di aapne , sunder prastuti

    ReplyDelete
  9. धन्यवाद अमरेन्द्र 'अमर' जी..!!!

    ReplyDelete
  10. चंद शब्दों में ...वाह बेहतरीन !!!!

    ReplyDelete
  11. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

    ReplyDelete

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!