ख्वाहिशें जुबां पे जब आयीं वो आलम याद रखना आँखों से जो बरसा था कभी वो सावन याद रखना मिले थे जहां हम दोनों बस वो आँगन याद रखना लिपटे थे तुम बेतकल्लुफ हो वो दामन याद रखना
धन्यवाद दी..!!
स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
ख्वाहिशें जुबां पे जब आयीं वो आलम याद रखना
ReplyDeleteआँखों से जो बरसा था कभी वो सावन याद रखना
मिले थे जहां हम दोनों बस वो आँगन याद रखना लिपटे थे तुम बेतकल्लुफ हो वो दामन याद रखना
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