Friday, December 2, 2011

'जुस्तजू..'




...


"आ..
मेरे शौक से जुस्तजू करले..

जो ना है मेरा..
भर दूंगा दामन में तेरे..

इक बार..
फ़क़त..
इक बार..
मुझे रूह में भर ले.!!!".


...

5 comments:

  1. Bas ek bar

    Ruh mein bhar le.....

    Gazab...
    Bahut sundar

    www.poeticprakash.com

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  2. रूह में ...सिमट आना ...समा जाना ........जीवन के सबसे खूबसूरत एहसासों में से एक .

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  3. fakat ek bar mujhe rooh me bhar le...khoobsurat ehsaas.

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  4. धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!

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  5. धन्यवाद राजेश कुमारी जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!