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"न आऊँ यहाँ..तो बेचैन हो जाते हैं..
जाने कितने पीर-बाबाओं के चक्कर लगाते हैं..
कितनी ही बार मोबाइल चैक करते हैं..और जो हैंग हो जाये अपनी 'रैम' के कारण..तो बस..'रीस्टार्ट सैशन'..
मन की बारिश में तन सूखा..और जिस्म नीलाम होने को उतारू.. मेरे जौहरी हो तुम..याद है न..??"
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--शुक्रिया #जां.. बेहिसाब रतजगे और एक टाइट हग.. <3 <3
बहुत खूब ... अदद जोहरी की को याद दिलाती रचना ..
ReplyDeleteसादर धन्यवाद..दिगम्बर नास्वा जी..!!
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