प्रियंकाभिलाषी..
Wednesday, August 4, 2021
'वजूद..'
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"फिर वहीं लौट आता हूँ..
हर दफ़ा..
उस इक वादे के बाद..
न तेरा हो सका..
न वजूद अपना कायम रहा..
खामोशी के खंज़र..
नक़ाब में मिलेंगे..
दास्तान-ए-चिराग..
खूब सिलेंगे..
मेरी आस..
साँस..
और..
ताप..
तुम मौजूद रहना!!"
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'बहाने..'
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"वो माँग रहा करीब आने के बहाने..
किसी को हारते हुए देखा है, ऐसे..!!"
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Tuesday, August 3, 2021
'पाठ जीवन के..'
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"अब कोई साथ रहे ना रहे.. कोई आरज़ू नहीं, कोई फिक्र नहीं, कोई फर्क नहीं... आएँ, जाएँ, रुकें, बैठें ....उनकी मर्ज़ी..!!"
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--#कुछ पाठ जीवन के,
यूँ भी सीखे जाते हैं..
'खुशियाँ..'
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"लहकता खुशियों का अंबार..
क्षण-क्षण समृद्ध अध्यात्म संसार..!!"
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'वक़्त'
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"वक़्त पसरा रहा मेज़ पर देर तक..
शाम का हिस्सा, कुछ यूँ बयां हुआ..!!"
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