Wednesday, December 23, 2009

माँ का आँचल....


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"ता-उम्र साथ चलतीं रहीं..उसकी दुआएँ..
बन कर साया..गम झेलती रहीं..उसकी दुआएँ..१

बलाएँ सब मोड़ती रहीं..अपनी अदाएँ..
सबब-ए-ज़िन्दगी सिखाती रहीं..उसकी दुआएँ..२

संजो रहमत के मोती..शफ़क़त महकाती..
गम के तहखाने समेटती रहीं..उसकी दुआएँ..३

कितना मासूम है..उसका आँचल..
तीर सब हटाती रहीं..उसकी दुआएँ..४..!"

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3 comments:

  1. very beautiful poem bundled up with lots of emotions and feelings for your loved ones..keep up the gr8 job

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  2. माँ .....तेरे हाथों की बरकत ...तेरी दुआओं की शफ़कत....तेरी पाक़ इबादत ...तेरे तब्बसुम की कायनात ...वात्सल्य परिपूर्ण तेरी गठरी ... संस्कार की पूर्ण पाठशाला ..इससे ज्यादा माँ के लिए और क्या कहा जाये ????

    हमारी माँ का दिल और उसकी महक हमेसा ताज़ा .....जो थी .वोही है ..और वोही रहेगी ....अनादि है.....न उनका ( माँ के दिल का ) जन्म का पता है न उनकी मृत्यु है .....इस संसार की ऐसी अदालत जहाँ हमारे सारे गुनाह और पाप एक पल में माफ़ है ....माँ व्यक्तित्व बनाती है, केवल पहचान नहीं ...माँ ममता का महा काव्य ............!!!

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