Wednesday, December 30, 2009

अभी-अभी..


...

"रूहानी हुआ है मंज़र..
अभी-अभी..

कश्ती का रुख बदला है..
अभी-अभी..

किश्तों में जीते रहे हैं..
हरदम..

मुस्कुराओ..

गुलिस्तान खिला है..
अभी-अभी..!"

...

4 comments:

  1. I know its wrong to comment in English...But can say one thing..u deserve to write a book of these lovely thoughts...I wud do the initial marketing...u could really be one poetess who feels, writes and conveys thought with such simplicity and purity...no adulteration in anyway at all!! love u keep up the good work...its a real stress buster to read ur lovely thoughts

    ReplyDelete
  2. Thnxx Buddy..!!! Thnxx for this lovely gesture..!!

    ReplyDelete
  3. बहुत उम्दा!!

    यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

    हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

    मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

    नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

    आपका साधुवाद!!

    नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ!

    समीर लाल
    उड़न तश्तरी

    ReplyDelete
  4. बहुत-बहुत धन्यवाद..

    ReplyDelete

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!