Tuesday, January 19, 2010

'दस साल का वजूद..'




"कुछ सिमटी यादें..
कुछ बेनाम ख़त..

कुछ अनकहीं बातें..
कुछ बेनकाब ग़म..

गुलमोहर की छाँव..
उजाले की दाँव..

वो वक़्त को..
मुट्ठी में थामना..

घंटों तक ताकना..
पलकें ना झपकाना..

बस यूँ ही..
फूलों के तोहफे..

नजरों में तलाशना..
मासूमियत का खजाना..

शाम-ओ-सेहर तस्वीर..
बस उनकी निहारना..


सिरहाने बैठ समझना..
तूफ़ान का मंज़र..

इक खामोश इशारा..
आंसुओं का नज़ारा..


कैसे समेटूँ मेरा..
दस साल का वजूद..!"

...

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