Friday, February 19, 2010

'दिल की राहें.. '

...

"अजीब हैं..
दिल की राहें..

जब ढूँढो..
अपना कोई..

नश्तर के सिवा..
सहलाने को..
नज़र आता नहीं..
अहबाब कोई..!"

...

1 comment:

  1. हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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