Saturday, February 27, 2010

' निगाहें दो-चार..'



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"अब तक ना मिले थे तुम..
हुआ था दिल बेज़ार..
कभी फुर्सत से आना ज़रा..
कर लेंगे निगाहें दो-चार..!"

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6 comments:

  1. "अच्छा है........."
    प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

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  2. वाह ....गज़ब कि पंक्तियाँ ......

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  3. धन्यवाद प्रणब जी..!!

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  4. बढ़िया!!

    ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
    प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
    पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
    गले लगा लो यार, चलो हम होली खेलें.


    आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

    -समीर लाल ’समीर’

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  5. धन्यवाद वर्मा जी..!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!