
...
"दामन..
उफ़..
खुशबू से महकता हुआ..
दरिया..
उफ़..
ताज़गी से उफ़नता हुआ..
इन्द्रधनुष..
उफ़..
रंगों से चहकता हुआ..
सरसों..
उफ़..
काज़ल से दमकता हुआ..
आसमां..
उफ़..
सितारों से लचकता हुआ..
गुलिस्तान..
उफ़..
जज्बातों से सरसराता हुआ..
अजीब है..
दोस्ती का..
यह..
तोहफा..
यह..
ख्वाब..
यह..
पोशीदा..
यह..
जुराब..!"
...
Wah! ji kya khub bayaa kiya hai dosti ko.....Aabhar!!
ReplyDeletehttp://kavyamanjusha.blogspot.com/
wah wah
ReplyDeletebahut sundar
बहुत बढ़िया .....रचना
ReplyDeleteधन्यवाद ranivishal जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद अरशद अली जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद विचारों का दर्पण जी..!!
ReplyDelete