Monday, February 15, 2010

'अदभुत चमकीला संसार..'


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"चमक-दमक कर निकली सवारी..
डाले जितना गुड़..मीठा उतना पावे..
खाना नसीब नहीं..महफ़िल में लोगों को..
पर..सोना-चाँदी से भरपूर..दुल्हन घर आवे..!"

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3 comments:

  1. बहुत खूब ....आज के दिखवाए पर अच्छा व्यंग्य ..

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  2. han bilkul sahi kaha
    kabhi kabhi aisa mai bhi mahsus karta hun.

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  3. धन्यवाद अरशद अली जी..!!

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