Monday, March 1, 2010

'लुका-छिपी..'


...

"हर शफ़क़ फैला है..
रंगों का मेला..

हर तरफ लगा है..
अरमानों का ठेला..

हर रूह खिला है..
अमन का रेला..

अब..
बस करो ना..

बहुत हुआ..
लुका-छिपी का झमेला..!!"

...

1 comment:

स्वागत है..आपके विचारों का..!!!