Thursday, April 8, 2010

'कफ़न..'


...

"तूफां मंज़िल हुए जाते हैं..
साहिल तन्हा हुए जाते हैं..
चलते हैं..कफ़न बाँध कर जब..
राहों में..फ़लक सिमट जाते हैं..!"

...

5 comments:

  1. सामयिक...हमारे सुरक्षा बलों के लिये सटीक, प्रेरक पंक्तियों के लिये बधाई

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  2. काबिलेतारीफ बेहतरीन

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  3. धन्यवाद विजयप्रकाश..!!

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  4. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

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