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"निभा सको गर वादा..इक चाहत हूँ मैं..
समेट सको गर आँसू..इक काज़ल हूँ मैं..
मिटा सको गर हसरत..इक आहट हूँ मैं..
अपना सको गर अक्स..इक आँचल हूँ मैं..
हर मोड़ बिका..साहिलों का सौदागर हूँ मैं..
मुद्दत से..
साँसों के शोर का चीरता..
बदमस्त खानः बदोश हूँ मैं..!"
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*बदमस्त = Intoxicated
खानः बदोश = Traveller..
nice
ReplyDeleteएक बार फिर अदभुत रचना ,,,,,,अति सुन्दर ...
ReplyDeleteविकास पाण्डेय
www.vicharokadarpan.blogspot.com
bahut khoob ...waah...http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/ aur Suman ji ka 'Nice' yahan bhi hai....
ReplyDeleteग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है
ReplyDeleteकम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
ReplyDeleteढेर सारी शुभकामनायें.
SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
vaah kyaa baat hai....lazawaab.....
ReplyDeleteधन्यवाद सुमन जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद विकास जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद दिलीप जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद भूतनाथ जी..!!
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